Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
आशापाशनिबद्धोऽन्तरितश्चेतश्च नीयते ।
यो विलोलमनोवृत्त्या मरणं तस्य राजते ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं कृश हूँ, मैं अत्यन्त दुःखी हूँ और मैं मूढ हूँ ये या इनसे अन्य भावनाएँ
जिसकी मति को नष्ट करती हैं, उसका मरना शोभा देता हे ॥३ ८॥ जो भीतर अनेक आशारूप पाशों
से बँधा है और चंचल मनोवृत्ति द्वारा इधर उधर ले जाया जाता है, उसका मरना शोभा देता है