Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
चित्तवृत्तिलता यस्य तालोत्तालमनोवने ।
फलिता सुखदुःखाभ्यां मरणं तस्य राजते ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसके ताड वृक्ष के समान राग आदि की उन्नति से (अभिवृद्धि से) सम्पन्न
मनरूपी वन में चित्तवृत्तिरूपी लता सुख-दुःखरूपी फलों से युक्त है, उसका मरना उचित है