Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 4, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
भाजनं त्वं विविक्तानां वचसां शुद्धिशालिनाम् ।
विविक्तहृदयः कण्ठे मुक्तानामिव राघव ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे विशाल
वक्षःस्थलवाला पुरुष कण्ठ में जातिशुद्धि से शोभित होनेवाले सुन्दर मोतियों का भाजन होता है, वैसे
ही विवेकयुक्त चित्तवाले आप विचारित, शुद्धि से शोभित होनेवाले उपदेश वचनों के भाजन हे