Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 40, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्रबुद्धाः सर्वकर्तारः करिष्यन्तीह किंचन ।
न तस्याकरणे नित्यमकर्तृत्वपदं गताः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी पुरुष
इस संसार में सब कुछ करते हुए भी कुछ भी नहीं करते हैं । कर्म के कभी-भी न करने पर वे सदा
अकर्तारूप से स्थित रहते हैं