Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 40, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
प्रबुद्धाश्चिन्मयाः शुद्धाः सर्वमाक्रम्य संस्थिताः ।
किं त्यक्तं परिगृह्णन्तु किं गृहीतं त्यजन्तु वा ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानवान्,
चैतन्यस्वरूप परमात्मस्वरूप के आविर्भाव से सब कुछ का तिरस्कार करके स्थित हुए शुद्धात्मापुरुष
पहले प्राप्त न हुए किस ऐहिक फल को ग्रहण करें या पहले से गृहीत किस फल का त्याग करें ?