Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
राज्येऽस्मिन्भोगसंपूर्णे दृष्टानुत्तमभूमिना ।
न गन्तव्यस्त्वयोद्वेगः स्वर्गे मानवकेऽथवा ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
तुम निरतिशयानन्द भूमि देख चुके हो, अतएव तुम्हें सब भोगों से
परिपूर्ण राज्य में अरतिरूप उद्वेग नहीं करना चाहिये ओर अपने पिता-पितामहों की भाँति स्वर्ग अथवा
भूलोक में उद्वेग उत्पन्न नहीं कराना चाहिये