Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
प्रबोधमेतु प्रह्रादो यदैवेति विचिन्तितम् ।
निमेषाद्वासुदेवेन तदैवैतदुपस्थितम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान् वासुदेव ने जब प्रह्लाद प्रबोध को प्राप्त हो, ऐसा विचार किया
तभी पलक भर में ऐसा हो गया