Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
दुःखासारवती राम संसारप्रावृडातता ।
जाड्यं ददाति परमं विचारार्कमपश्यताम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस सृष्टि का अवलम्बन करके आप शीघ्र
आत्मदर्शन के लिए प्रयत्न करें। विचारत्मा आप नित्यपद को प्राप्त होंगे ॥२ २॥ हे रामचन्द्रजी, दुःखरूपी
मुसलाधार वृष्टिवाली संसाररूपी वर्षा ऋतु, जो चारों ओर व्याप्त है, विचाररूपी सूर्य को न देख रहे
लोगों को परम अज्ञान देती है