Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अज्ञानमुच्यते पापं तद्विचारेण नश्यति ।
पापमूलच्छिदं तस्माद्विचारं न परित्यजेत् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान पाप कहलाता है, वह
विचार से नष्ट होता है, इसलिए पाप की जड़ उखाड़ फेंकनेवाले विचार का परित्याग नहीं करना
चाहिये