Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
पूर्वमेव बलात्तस्मादाक्रम्येन्द्रियपञ्चकम् ।
अभ्यसन्सर्वयत्नेन चित्तं कुरु विचारवत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
(जिस विषय में प्रयत्न करने से विचारोदय होता है, उसे
दशती हैं।) इसलिए दसों इन्द्रियो को जबरदस्ती अपने वश में कर अभ्यास करते हुए सब प्रयत्नों से मन
को विचारवान् बनाओ