Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
पौरुषं यत्नमाश्रित्य प्रोल्लङ्घ्येन्द्रियपर्वतम् ।
संसारजलधिं तीर्त्वा पारं गच्छ परं पदम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
पौरुष प्रयत्न का अवलम्बन
कर इन्द्रियरूप पर्वत को लाँघधकर संसाररूप सागर को पार कर परम पद को प्राप्त होओ