Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
हृद्गुहावासिचित्तत्त्वं मुख्यं सानातनं वपुः ।
शङ्खचक्रगदाहस्तो गौण आकार आत्मनः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हृदयरूपी गुहा में निवास
करनेवाला चित्-तत्त्व ही आत्मा का (विष्णु का) मुख्य शाश्वत स्वरूप है। हाथ में शंख, चक्र, गदा धारण
किया हुआ आकार गौण है