Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
संवेद्यनिर्मुक्तनिरामयैकसंविन्मयास्वादमनन्तरूपम् ।
सन्मात्रमास्वादय सर्वसारं पारं परं प्राप्स्यसि जन्मनद्याः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप बाह्य और आभ्यन्तर विषयों से निर्मुक्त,
निरामयैकसंविन्मय, स्वयं निरतिशयानन्दरूप से भासित होनेवाले अनन्तरूप सन्मात्र का, जो सबका
सार है, निरन्तर तदाकारवृत्ति से आस्वाद लीजिये। यों उसका आस्वाद ले रहे आप जन्मरूप नदी के
उस पार पहुँच जाओगे