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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

यो हि विष्णुः स एवात्मा यो ह्यात्मासौ जनार्दनः । विष्ण्वात्मशब्दौ पर्यायौ यथा विटपिपादपौ ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा कार्य और कारण उपाधि का त्याग करने पर विशिष्ट चिन्मात्र का अभेद है ही । इस प्रकार लक्ष्यपरक विष्णु और आत्मा शब्द की पर्यायता ही है, ऐसा कहते हैं। जो विष्णु है वही आत्मा है और जो आत्मा है वही विष्णु है। जैसे विटप और पादप शब्द पर्याय हैं वैसे ही विष्णु ओर आत्मशब्द पर्याय हैं भाव यह कि विटपवत्व (शाखावत्व) और पादकरणकपान कर्तृत्वरूप उपाधि का भेद होने पर भी खण्ड वृक्ष स्वरूप में जैसे विटप और पादप शब्दों की पर्यायता है वैसे ही कार्य और कारणरूप उपाधि का भेद होने पर भी परिशिष्ट चिन्मात्र स्वरूप में आत्मा और विष्णु शब्दों की पर्यायता ही है