Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

एकदारब्धवान्स्नानं सरस्युदितपङ्कजे । चिन्तयन्वैष्णवं वाक्यं महर्षिरिव मानसे ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

एक समय जैसे महर्षि योगबल से अतीत ओर अनागत को देखने के विमान सरोवर में चिन्तन करते हैं वैसे ही विष्णु भगवान्‌ के वचन का चिन्तन कर रह उसने फूले हुए कमलवाले तालाब में स्नान करना आरम्भ किया