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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

आशौरिदर्शनं तस्मिंस्तपोर्थं सरसि द्विजः । आकण्ठमम्बुनिर्मग्नः प्रावृट्पद्म इवाविशत् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवान विष्णु का दर्शन न मिले तब तक तपस्या करने के लिए वर्षाकाल के कमल के समान गले तक जल में डूबा हुआ वह ब्राह्मण उस तालाब में प्रविष्ट हुआ