Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
विलसन्तं वनान्तेषु तया सह नवेष्टया ।
श्यामलं श्यामया भृङ्गं भृंग्येव कुसुमर्द्धिषु ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे काली भँवरी के साथ
काला भौरा पुष्पों की समृद्धि से पूर्ण वनान्ता मे विहार करता है वैसे ही श्यामवर्णं वाला वह नूतन होने
के कारण ही अभीष्ट श्यामवर्णवाली उसके साथ पुष्पों की समृद्धि से पूर्ण वन प्रान्तो मे विहार करता
था