Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

एकदा प्राप कीराणां मण्डले श्रीमतीं पुरीम् । खेचरो विहरन्शून्ये सद्विमानमिवाम्बरे ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

एक समय आकाश में सुन्दर विमान के समान आकाश में विचरण करनेवाला वह कीर लोगों के निवासभूत देश में श्रीमती पुरी में पहुँचा