Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
गर्भवासभराक्रान्तं पीडितं पेलवाङ्गकम् ।
श्वपचीहृदये सुप्तं स्वविष्ठायामिवाकुलम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
गर्भवास के दुःखों से वह पीडित था, उसके कोमल अंग थे ओर वह अपनी विष्टा के समान चाण्डाली के
हृदय मेँ सोया था, अतएव व्याकुल था