Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verses 30–31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verses 30–31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 30,31
संस्कृत श्लोक
अथ सर्वे वयं दीर्घकालं श्वपचदूषिताः ।
प्रायश्चित्तैर्न शुद्ध्यामः प्रविशामो हुताशनम् ॥ ३० ॥
इति निर्णीय नगरे नागरा मन्त्रिणस्तथा ।
अभितो ज्वालयामासुश्चिताः शुष्केन्धनैधिताः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर हम सब लोग चिरकाल
तक चाण्डाल के स्पर्श से दूषित हैं, प्रायश्चितं से हमारी शुद्धि होगी नहीं; अतएव हम लोग अग्नि में
प्रवेश करते हैं, ऐसा निश्चयकर नगर मेँ सब नागरिक तथा मन्त्रियों ने सूखी हुई लकड़ियों से बढ़ाई हुई
चिताएँ चारों ओर बनाई