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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

बह्वमन्यत नो हारकेयूरवलयान्यसौ । प्रभुताबृंहितं चेतो नाहार्यमभिनन्दति ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

वह हार, बाजूबन्द कड़े आदि आभूषणों का बहुत आदर न करता था क्योकि प्रभुता से परिपूर्ण चित्त को कृत्रिम आभूषण आदि भले नहीं लगते