Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
धुनानं वल्लकीतन्त्रीं करपल्लवलीलया ।
मृदुरेफं रणद्रेफामलिश्रेणिमिव द्रुमम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
वह जैसे भ्रमर पंक्ति, जिसके पंख शब्द कर रहे हों, वृक्ष को कम्पित
करती हे वैसे ही करपल्लव की लीला से वीणा के तारों को मधुर स्वर के साथ बजा रहा था