Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अविवाहोऽस्मि जानामि न स्वरूपमपि स्त्रियः ।
दुष्टायाः क्षोभकारिण्या मदिराया इव द्विजः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं अविवाहित हूँ जैसे ब्राह्मण चित्त में क्षोभ पैदा करनेवाली दुष्ट मदिरा के रस
को नहीं जानता वैसे ही मैं क्षोभकारिणी स्त्री का स्वरूप भी नहीं जानता