Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

बोधमाप शनैः शान्तः स्वमेवोन्निद्रधीरिव । क्षीबतायां प्रशान्तायां यथा परिणताशयः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मदिरा आदि के मद के शान्त होने पर स्वच्छ चित्त हुआ पुरुष" मैं अमुक हूँ” इस बोध को प्राप्त होता है वैसे ही निद्रारहित बुद्धिवाले शान्त हुए गाधि धीरे-धीरे पूर्वोक्त गाध्य अहंभाव बोध को प्राप्त हुए