Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
यथा तेनानुभूतं तच्छवापचं तत्तथैव तैः ।
ग्रामीणैस्तस्य कथितं सर्वैरेवावखण्डितम् ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार गाधि ने चाण्डालता का अनुभव किया था उसी प्रकार सभी ग्रामीणों
ने ज्यों-का-त्यों सारा वृत्तान्त कहा