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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

अत्रोड्डयनलोलानां काकभासपत्त्रिणाम् । धृतानामन्यदाशार्थं ग्रथितं वंशपञ्जरम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर दूसरे दिन के भोजन के लिये पकड़े हुए काक, भास आदि पक्षियों का जो उड़ने के कारण चंचल थे; बाँस का पिंजड़ा बनाया था