Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चचाल तस्माद्दीर्घेण देशात्कालेन कार्यवित् ।
भूत्मण्डलमुत्सृज्य प्राप देशान्तरं क्रमात् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
कर्तव्य को जाननेवाले गाधि उस देश से बहुत काल के बाद चले एवं क्रम से भूतमण्डल
नामक देश को छोड़कर दूसरे देश में पहुँचे