Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तत्र प्राप महीपालनगरं नगसंनिभम् ।
जगद्भ्रमणखिन्नात्मा स्वर्लोकमिव नारदः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर गाधि, जिस प्रकार संसार की यात्रा करने से थके हुए नारदजी स्वर्ग को प्राप्त करते हैं वैसे ही
रत्नों से समृद्ध पर्वत के समान ऊँचे महलोंवाले राजनगर में पहुँचे