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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवानुवाच । गाधे कच्चित्त्वया दृष्टा माया मम गरीयसी । दृष्टं त्वया जगज्जालचेष्टितं दैष्टिकात्मकम् ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

वहाँ उस बड़े भारी तेजस्वी गाधि ने डेढ़ वर्ष तक चुल्लूभर पानी पीकर विष्णु भगवान्‌ को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की ॥ ३ ७॥ इसके अनन्तर जल की तरह स्वच्छ मूर्तिवाले, कमल नेत्र एवं नीलकमल की तरह श्यामवर्णवाले विष्णु भगवान्‌ शरत्‌ काल मे जलस्वरूप एवं नीलकमलों से श्यामवर्णवाले बड़े भारी सरोवर की नाई गाधि पर प्रसन्न हो गये ॥ ३ ८॥ गाधि के निवासभूत पर्वतराज की उस गुफा में भगवान्‌ उनके पास आये और आकाश में मेघ के समान विशुद्ध श्याम कान्तिवाले भगवान्‌ वहाँ खड़े हो गये ॥ ३ ९॥ श्रीविष्णु भगवान्‌ ने कहा : हे गाधि, क्या तुमने मेरी गुरुतर माया को देखा और संसाररूपीजाल के कार्य को भी देखा जिसमें भाग्य ही निमित्त है ?