Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।
गाधे स्वाधिविधूतस्य स्वरूपस्यैतदात्मकम् ।
चेतसोऽदृष्टतत्त्वस्य यत्पश्यत्युरुविभ्रमम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीभगवान् ने कहा : हे गाधि, जिस संसाररूपी भ्रम को तुम देखते हो यह सब जिसको तत्त्वज्ञान
नहीं हुआ है, अतएव वासनारूपी व्याधि से जो ग्रस्त है उस मनोभाव को प्राप्त हुए आत्मा का स्वरूप है,
वस्तुतः कुछ नहीं है