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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

उपलभ्य तथैवात्मवृत्तान्तं जनतस्ततः । हरिमाराधयामास पुनरद्रिगुहां गतः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर लोगों के मुँह से अपने चाण्डलत्व आदि के वृत्तान्त को पूर्वानुभूत के तुल्य ही सुनकर और चिहों से देखकर फिर पर्वत की गुफा में जाकर उन्होने श्रीहरि भगवान्‌ की आराधना की