Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यदेव ते मनोमात्रे सहसा प्रतिभासते ।
तरुरुच्चजनेनेव तेनैवाक्रम्यसे क्षणात् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो ही तुम्हारे चित्त में सहसा
प्रतिभासित होता है ऊँचे पुरूष से वृक्ष के समान क्षणभर में उसी से तुम आक्रान्त हो जाते हो यानी
उसके अभिमान से तिरस्कृत हो जाते हो