Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
उवाच गाधिं भगवान्मयूरमिव वारिदः ।
किं त्वं प्रार्थयसे भूयस्तपसेति प्रसादवान् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मेघ मयूर के प्रति बोलता है वैसे ही प्रसन्न हुए भगवान् गाधि के प्रति
बोले : हे गाधि, तपस्या से तुम फिर क्या चाहते हो ?