Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
निरस्ताशेषसंकल्पस्तपस्तत्र चकार ह ।
दशवर्षाणि तेनासावात्मज्ञानमवाप ह ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे गीला मेघ पर्वत पर जाता है वैसे ही
करुणा से आर्द्र चित्तवाले गाधि कल्याणकारी चित्तनियमन के अभ्यास के लिए तथा सर्वश्रेष्ठ पद में
विश्रान्ति के लिए ऋष्यमूक पर्वत पर गये ॥ ४ ५॥ वहाँ पर सब संकल्पो का त्यागकर गाधि ने दस वर्ष तक
तप (मन तथा इन्दियों का संयम) किया, उससे उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त किया