Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
मायया भूतभूर्दृष्टा त्वयेत्युक्तोऽस्मि किं प्रभो ।
मोहनाशाय महतां वचो नो मोहवृद्धये ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
आपने मुझसे तुमने माया से भूतमण्डल देखा, ऐसा क्यों कहा ? महात्माओं का वचन मोह के नाश के
लिए होता है न कि मोह की वृद्धि के लिए। माया से दृष्ट पदार्थ कालान्तर में अवश्य व्यभिचरित होते हैं,
किन्तु ये तो अव्यभिचरित हैं, अतः ये माया है, ऐसा कैसे समझा जा सकता है ? यह भाव है