Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
विकल्पजालनिर्मुक्तो मायाञ्जनविवर्जितः ।
आत्मनात्मनि तृप्तात्मा विज्वरो भव राघव ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप विकल्पों की परम्पराओं से रहित, मायारूपी काजल से शून्य, अपने से
अपने में तृप्त ओर सन्ताप शून्य होइये