Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
आत्मन्येवात्मनौदार्यं भज पूर्णं इवार्णवः ।
आत्मन्येवात्मनाह्लादं भज पूर्णन्दुबिम्बवत् ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्ण सागर के समान अपने से ही
अपने में पूर्णकामता का सेवन कीजिये । पूर्ण चन्द्रमण्डल के समान अपने से ही अपने में सब तापो की
निवृत्ति के सुख का अनुभव कीजिये