Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
संकल्पांशानुसंधानवर्जनं चेत्प्रतिक्षणम् ।
करोषि तदचित्तत्वं प्राप्त एवासि पावनम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, यदि आप भावी विषयों के संकल्प का ओर उसके
अंशभूत पदार्थो का अनुसन्धान त्याग प्रत्येक क्षण में सावधानी से कीजिये, तो आप पवित्र अचित्तता
को प्राप्त ही हैं