Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अविवेकादुपाहृत्य चेतसोद्यमनिश्चयैः ।
बलात्कारेण संयोज्यं शास्त्रसत्पुरुषक्रमैः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त को अविवेक से हटाकर उद्यम के (पुरुषप्रयत्न के) साथ अवश्य इसी जन्म में ज्ञान प्राप्त
करूँगा, इस तरह के दृढ़ निश्चयों से शास्त्रों और सत्संगति में जबरदस्ती लगाना चाहिये