Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
तैर्नो भजामहे पुंभिर्ये स्वभावमुपागताः ।
शेषाः पुरुषनामानो गर्दभा दीर्घबाहवः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो लोग
हमारे प्रत्यगात्मभाव को प्राप्त हुए हैं यानी जीवन्मुक्त पुरुष हैं जन्म को सार्थक करने से, पुरुषार्थ
साधन से तथा सफल पौरुषवाले होने से उन श्रेष्ठतम पुरुषों के साथ हम सदा मैत्री करते हैं। अन्य लोग
तो पुरुषार्थ के उपयोगी पौरुष से हीन होने के कारण नाममात्र के पुरुष हैं, पुरुष शब्द के अर्थ का उनमें
नामनिशान भी नहीं है, इसलिए लम्बी बाहुवाले वे गदहों के समान उपेक्षा के ही पात्र हैं, दर्शन आदि के
योग्य भी नहीं है