Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 58
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 58
संस्कृत श्लोक
अहंकारविकारेण ममतामलहेलया ।
इदं ममेति भावेन चेतो गच्छति पीनताम् ॥ ५८ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार के विकास से, ममतारूपी मल मे आसक्ति
से तथा यह शरीर मेरा आत्मा या भोग स्थान है, इस भाव से चित्त स्थूलता को प्राप्त होता हे