Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अथेमं चिन्तयामास संसारामयभीरुधीः ।
एकान्त एव निवसन्कदाचित्कान्तमानसः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर एकान्त मेँ ही निवास कर रहे,
संसाररूपी रोग से भयभीत बुद्धिवाले, पवित्र, मनवाले उन्होने किसी समय निम्ननिर्दिष्ट रीति से विचार
किया