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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

कदा बहुलकल्लोलां नावा परमया धिया । परितीर्णो भविष्यामि मत्तां तृष्णातरङ्गिणीम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं बहुत-सी बड़ी-बड़ी तरगों से भरी हुई तथा अविवेक से खूब बढ़ी हुई तृष्णारूपी नदी को विवेकबुद्धिरूपी नौका से कब पार कर जाऊँगा ?