Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
यदि यासि महीरन्ध्रं ब्रह्मलोकमथापि वा ।
तन्न निर्वाणमायासि विनोपशमनामृतम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
चाहे तुम पाताल में जाओ चाहे ब्रह्मलोक में भी चले जाओ, किन्तु शम
रूपी अमृत के बिना उस निरतिशय सुख में विश्रान्ति को प्राप्त नहीं हो सकते