Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इमा विचित्राः कलना भावाभावमयात्मिकाः ।
दुःखायैव तवोग्राय न सुखाय कदाचन ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
भाव (इष्ट वस्तु का सम्पादन) ओर अभावमय (अनिष्ट का निवारण) ये
विचित्र विषय तुम्हारे उत्कट दुःख के लिए ही हैं, ये सुख के लिए कभी नहीं हो सकते हैं