Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
क्षयोदयदशाधात्रीं पर्यन्तपरितापिनीम् ।
जानन्नपि जगत्सृष्टिं न त्यक्ष्यसि विनंक्ष्यसि ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
सारे वक्तव्य का संकलन कर एक उक्ति से कहते हैं।
यदि तुम जगत्-प्रवृत्ति को जन्म तथा मरणकी एवं बल आदि और दरिद्रता आदि अवस्थाओं का
पालन करनेवाली (धात्रीरूप), मरने के बाद भी नरक, स्थावर आदि गतियों में संताप देनेवाली जानते
हुए भी नहीं छोड़ोगे, तो विनष्ट हो जाओगे