Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
कः किलायं मुधा मोहो बालस्येवाविचारिणः ।
अयं सोऽहमिति भ्रान्तिस्त्वहंतापरिकल्पिता ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
यह (देह) वह (आत्मा) मैं हूँ ऐसी भ्रान्ति की जो
तुमने अहन्ता से कल्पना की है, वह अविचारशील बालकों के तुल्य व्यर्थ मोह हे । मैं तो विचारशील हूँ,
मुझको वह मोह कहाँ ? यानी कुछ भी नहीं है, यह भाव है