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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

इदं घ्राणमियं जिह्वा त्वगियं श्रवणे इमे । इदं चक्षुरसौ स्पर्शः कोऽसावहमिति स्थितः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

यह नासिका हे, यह जिह्वा है, यह त्वचा है, ये दो कान हैं, यह चक्षु हे, यह स्पन्द है (कर्म की हेतु कर्मेन्द्रियाँ हैं), फिर यह “अहम्‌” रूप से स्थित पदार्थ कोन है ? भाव यह कि नासिका आदि भी इदन्ता से प्रतीत होने के कारण अहंशब्दार्थ नहीं है