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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

स तत्रोपाविशद्वृत्तीश्चेतसस्तनुतां नयन् । अन्तःशुद्धवपुः श्रृङ्गे वृष्य मूक इवाम्बुदः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मेघ वृष्टि से अपने जाड्य का (जलता का) त्याग कर सफेद और गर्जन रहित होकर पर्वत के शिखर पर बैठता है वैसे ही शुद्ध अन्तःकरणवाले वे चित्त की वृत्तियों को जड़ विषय के त्याग से लघु बनाते हुए उस पर बैठे