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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

वासनाभ्यः समाहृत्य मनोमृगमुपप्लुतम् । निर्विकल्पसमाध्यर्थं चकारेमां विचारणाम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

समीप में (विषयों में) दौड़े हुए मनरूपी मृग को वासनाओं से हटाकर उन्होने निर्विकल्प समाधि के लिए यह विचार किया